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नासा की लेजर तकनीक अब बर्फ पिघलने की निगरानी में मदद कर रही है
1964 में नासा ने एक उपग्रह से लेजर किरण उछालकर एक ऐतिहासिक प्रयोग किया था। आज उसी तकनीक का उपयोग पृथ्वी पर बर्फ के पिघलने की गति को मापने में हो रहा है।
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अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विकसित की गई एक तकनीक जलवायु परिवर्तन की निगरानी का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गई है। नासा की लेजर तकनीक, जो पहली बार 1964 में कक्षा में स्थित एक उपग्रह से प्रकाश किरण उछालने के लिए उपयोग की गई थी, अब ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ की परत की मोटाई मापने में सहायक साबित हो रही है।
यह अत्याधुनिक लेजर तकनीक उपग्रहों के माध्यम से पृथ्वी की सतह तक प्रकाश भेजती है और परावर्तित किरणों को मापकर बर्फ की परत में होने वाले परिवर्तनों का आकलन करती है। इस पद्धति से वैज्ञानिकों को ग्लेशियरों और ध्रुवीय बर्फ की चादरों में आ रहे परिवर्तनों का सटीक डेटा मिलता है।
जलवायु वैज्ञानिकों के लिए यह जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बर्फ के पिघलने की दर वैश्विक तापमान वृद्धि का एक प्रमुख संकेतक है। इस तकनीक से प्राप्त आंकड़े भविष्य में समुद्र स्तर में संभावित वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालीन प्रभावों को समझने में मदद देते हैं।
मूल रूप से अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए विकसित यह प्रौद्योगिकी आज पृथ्वी के भविष्य को समझने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है, जो दर्शाता है कि विज्ञान के अनुप्रयोग कितने विविध और व्यापक हो सकते हैं।