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वंदे मातरम् पूर्ण रूप से गाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए: भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और इसे पूरी तरह गाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। विजयदशमी समारोह में भागवत ने जोर देकर कहा कि यह गीत बंग-भंग के विभाजन को रोकने का माध्यम बना था।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वार्षिक विजयदशमी समारोह में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय राष्ट्रीयता की पहचान है और इसे गर्व के साथ पूरी तरह गाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस गीत में किसी भी प्रकार की हिचकिचाहट या आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
भागवत ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह गीत लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल के विभाजन के षड्यंत्र को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश प्रशासक ने हिंदुओं और मुसलमानों को धार्मिक आधार पर बाँटने की योजना बनाई थी, लेकिन समाज के दृढ़ प्रतिरोध से यह योजना विफल हुई।
आरएसएस प्रमुख ने वंदे मातरम् को सामाजिक एकता और देशप्रेम का प्रतीक बताया और कहा कि यह भारतीय राष्ट्र के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। भागवत ने जोर देकर कहा कि इस ऐतिहासिक गीत को पूरी गरिमा और स्पष्ट कंठ से गाना चाहिए, क्योंकि यह हमारा राष्ट्रगीत है और राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है।