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जी20 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर हल्के नियमों को दी मंजूरी
अमेरिका के नेतृत्व में जी20 देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों के लिए कम नियंत्रणकारी दृष्टिकोण को अपनाया है। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन और सिलिकॉन वैली के लिए एक महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है।
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जी20 राष्ट्रों ने सर्वसम्मति से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उदीयमान प्रौद्योगिकियों के विनियमन के संबंध में अमेरिका द्वारा प्रस्तावित दिशानिर्देशों को स्वीकार किया है। ये अनिवार्य दिशानिर्देश एक हल्के-हाथ के दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं जो नवाचार को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हैं।
इस समझौते से अमेरिकी प्रशासन को अपनी तकनीकी नीति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का अवसर मिला है। सिलिकॉन वैली के प्रमुख हितों को भी इस निर्णय में प्रतिफलित किया गया है, जहां कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां कम नियामक बाधाओं की वकालत करती रहीं।
जी20 के इस निर्णय का अर्थ है कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाए जाएंगे। हालांकि, ये दिशानिर्देश गैर-बाध्यकारी प्रकृति के हैं, जिसका मतलब है कि सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय नीतियों को स्वतंत्र रूप से तैयार कर सकते हैं।
इस निर्णय से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलने की उम्मीद है, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में। विकासशील देशों के लिए इसका अर्थ है कि वे भी इन तकनीकों को अपनाने में अधिक लचीलापन रखेंगे।