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ट्रंप के दबाव में G7 देशों ने आपातकालीन तेल भंडार खोलने को मंजूरी दी
समूह के सात विकसित देशों ने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने का निर्णय लिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद उठाया गया है।
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G7 समूह के देशों ने वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अपने सामरिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया है। यह सहमति अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में आई, जिन्होंने यूरोपीय संघ को चेतावनी दी थी कि आपातकालीन भंडार न खोलने की स्थिति में अमेरिका अपने तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है।
इस समझौते के तहत G7 देश न केवल अपने भंडार जारी करेंगे, बल्कि ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाएंगे। यह प्रतिबद्धता वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। G7 देशों के इस समन्वित प्रयास से वैश्विक तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर मुद्रास्फीति का दबाव कम हो सकता है।