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14 सितंबर को गणेश चतुर्थी, राहु प्रभाव निवारण के लिए विशेष पूजा

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की आराधना राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से गणपति की उपासना बुद्धि और विवेक को बढ़ाने का माध्यम मानी जाती है।

LSN India · 10 September 2026

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी, राहु प्रभाव निवारण के लिए विशेष पूजा

14 सितंबर को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी का धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों महत्व है। इस पवित्र दिन पर भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाधाओं का निवारण होता है।

ज्योतिष के अनुसार, राहु को भ्रम, आशंका और मायाजाल का कारक माना जाता है। राहु की दशा या अंतर्दशा से गुजर रहे व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, गणपति बुद्धि, विवेक और शुभ समृद्धि के देवता माने जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहु के प्रतिकूल प्रभावों की स्थिति में भी गणेश जी की सच्ची भक्ति और आराधना व्यक्ति को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम होती है। विशेषकर राहु की महादशा या अंतर्दशा के दौरान गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा-पाठ का विधान किया जाता है। विद्वानों का मानना है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा से आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।