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गणपति विसर्जन 2026: अनंत चतुर्दशी पर शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
इस वर्ष 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन का पर्व मनाया जाएगा। भक्तों को बप्पा को विदा करते समय शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपरागत नियमों की जानकारी होनी चाहिए।
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गणेश चतुर्थी के बाद दस दिनों तक घरों में भगवान गणपति की पूजा की जाती है। इस वर्ष 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी, जिस दिन गणपति विसर्जन का पारंपरिक विधान है। विसर्जन के समय शुभ मुहूर्त का पालन करना परंपरागत मान्यता के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी को गणपति विसर्जन का सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस दिन भक्त पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ गणपति को जल में विसर्जित करते हैं। विसर्जन से पहले परिवार के सदस्यों के साथ गणपति की आरती की जाती है और उन्हें प्रणाम किया जाता है।
विसर्जन की पूजा विधि में गणपति को तिल, दूर्वा, फूल और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं और आशीर्वाद लेते हैं। पूजा के बाद गणपति की मूर्ति को नदी, तालाब या पानी के स्रोत में विसर्जित किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी का पर्व सर्वसाधारण को एकता और भाईचारे का संदेश देता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। गणपति विसर्जन के साथ ही भक्तों का मानना है कि बप्पा अगले वर्ष फिर से अपने घरों में आएंगे।