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गौहाटी उच्च न्यायालय ने बेटी की मौत के आरोप में महिला को दोषमुक्त किया
गौहाटी उच्च न्यायालय ने एक महीने की बेटी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने महिला की मजबूरी में दिए गए अपराध स्वीकार को खारिज कर उसे बरी कर दिया।
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गौहाटी उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक महिला को बरी कर दिया है, जिसे पहले उसकी एक महीने की बेटी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने पाया कि महिला का अपराध स्वीकार दबाव में दिया गया था और वह स्वैच्छिक नहीं था।
न्यायालय के अनुसार, प्रस्तुत साक्ष्य अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने मामले की विस्तृत जांच के बाद यह निर्णय लिया कि महिला के विरुद्ध आरोप तक सिद्ध नहीं हुए हैं।
यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में न्याय सुनिश्चित करने और मजबूरी में दिए गए बयानों की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। गौहाटी उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि किसी को भी उचित साक्ष्य के बिना दंडित नहीं किया जा सकता।
इस मामले को आपराधिक न्याय प्रणाली में अधिकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र साक्ष्य के महत्व के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।