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तलाक-ए-हसन को मान्य बताया, नए कानून में पंजीकरण होगा: गौहाटी उच्च न्यायालय
गौहाटी उच्च न्यायालय ने तलाक-ए-हसन को वैध तलाक का रूप माना है और कहा है कि इसे नए कानून के तहत पंजीकृत किया जाना चाहिए। अदालत ने नोट किया कि पत्नी को इस निर्णय को चुनौती देने का अधिकार है।
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गौहाटी उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तलाक-ए-हसन को तलाक का एक मान्य रूप घोषित किया है। अदालत के अनुसार, इस प्रकार के तलाक को नए कानून के तहत पंजीकृत किया जाना चाहिए।
न्यायाधीश की टिप्पणी में कहा गया कि मामले में पत्नी को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। इसके बावजूद, न्यायालय ने पत्नी को अपने अधिकारों का प्रयोग करने की स्वतंत्रता दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी को किसी भी उपयुक्त मंच में तलाक-ए-हसन को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। यह निर्णय मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
तलाक-ए-हसन इस्लामिक कानून में तलाक का एक स्वीकृत तरीका है जिसमें निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इस फैसले से तलाक संबंधी कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने की उम्मीद है।