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डिग्री के बिना Gen Z को मिल रहे 50,000 तक मासिक आय
भारत के युवा पढ़ाई के साथ ही डिजिटल कौशल और फ्रीलांसिंग से आजीविका बना रहे हैं। यूजीसी वीडियो, माइक्रो-सास और स्किल-आधारित प्लेटफॉर्म उन्हें विदेशी क्लाइंटों से डॉलर में भुगतान तक पहुंचा दे रहे हैं।
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भारत में जेनरेशन जेड के छात्र-छात्राएं कॉलेज की पढ़ाई जारी रखते हुए ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का रास्ता खोज निकाले हैं। मुख्यतः 19-20 साल के ये युवा विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और फ्रीलांसिंग मॉडल के माध्यम से प्रति माह 25 से 50 हज़ार रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं।
यूजीसी कंटेंट निर्माण, माइक्रो-सास (सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस) टूल्स और कौशल-आधारित फ्रीलांसिंग प्रोजेक्ट इस नए आर्थिक मॉडल के मुख्य आधार बन गए हैं। ये विकल्प न केवल भारतीय क्लाइंटों तक सीमित हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रवेश का द्वार भी खोलते हैं।
इस प्रवृत्ति के कारण पारंपरिक शिक्षा मॉडल में परिवर्तन की गति तेज़ हुई है। विदेशी नियोक्ताओं से डॉलर में सीधे भुगतान पाना इन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ साबित हुआ है। डिग्री प्राप्ति से पहले ही व्यावहारिक अनुभव और आय का यह संयोजन शिक्षा प्रणाली को पुनर्परिभाषित कर रहा है।
व्यावसायिक विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहां डिजिटल कौशल और स्वरोज़गार की ओर रुझान बढ़ रहा है। तथापि, शिक्षा के साथ आजीविका का यह संतुलन दीर्घकालीन व्यावसायिक विकास के लिए कितना कारगर साबित होगा, यह आने वाले समय का विषय है।