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आर्थिक दबाव में जेन जी, नौकरी के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत तलाश रहे
भारत में जेन जेड की आबादी का आधा हिस्सा आर्थिक कारणों से बड़े जीवन निर्णय स्थगित कर रहा है। एकमात्र वेतन से जीविका चलाना मुश्किल होने के कारण युवा साइड हसल को अपना रहे हैं।
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बढ़ती महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत के जेन जेड को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने पड़ रहे हैं। डेलॉयट की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 54 प्रतिशत जेन जेड आबादी आर्थिक कारणों से अपने प्रमुख जीवन निर्णयों को स्थगित कर रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नई पीढ़ी के लिए आर्थिक चिंताएं कितनी गंभीर हो गई हैं।
पारंपरिक नौकरी पर निर्भरता अब युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। जीवन निर्वाह की खर्चों में वृद्धि, भविष्य की अनिश्चितता और बचत की आवश्यकता के दबाव में जेन जेड अपनी मुख्य नौकरी के साथ अतिरिक्त आय के विकल्प खोज रहे हैं। साइड हसल अब केवल आय बढ़ाने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति युवा पीढ़ी की क्रय क्षमता और आत्मविश्वास में कमी को दर्शाती है। घर खरीदना, शादी करना और दीर्घकालीन निवेश जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए युवा लोग वर्तमान में आर्थिक रूप से तैयार नहीं महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मायने रखती है।