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भू-राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव को समझना आवश्यक है
विश्व परिवर्तन के बाद भी पुरानी भू-राजनीतिक व्यवस्था लोगों की आदतों में लंबे समय तक जीवित रहती है। इस बदलाव को समय पर पहचानना और उसके अनुसार नीति निर्धारण करना प्रमुख चुनौती है।
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भू-राजनीतिक संरचनाओं में परिवर्तन धीरे-धीरे होता है। विश्व व्यवस्था चाहे कितनी भी बदल जाए, लेकिन समाज और नीति निर्माताओं की मानसिकता उन पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों में बंधी रहती है जो पहले कारगर थीं।
इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि बदलती परिस्थितियों को समय पर पहचाना जाए। जब तक नीति निर्माता नई वास्तविकता को समझ लेते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है और नुकसान हो चुका होता है।
इसलिए भू-राजनीतिक संतुलन में आने वाले बदलावों को पहले से ही पहचानना और उन्हें संभालने की तैयारी करना आवश्यक है। यह दृष्टिकोण ही किसी देश या व्यवस्था को संकट से बचा सकता है और एक सुचारु संक्रमण सुनिश्चित कर सकता है।
वास्तव में, वैश्विक राजनीति में सफलता उन्हीं को मिलती है जो परिवर्तन को जल्दी पहचान कर अपने आपको ढाल लेते हैं, न कि वे जो पुरानी व्यवस्था में अटके रहते हैं।