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जर्मनी का पुनर्मिलन: 45 वर्षों के विभाजन के बाद एकता
द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्ति के बाद से विभक्त रहे जर्मनी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से आज के दिन आधिकारिक तौर पर एक हो गए थे। यह ऐतिहासिक घटना 45 वर्षों के अलगाववास को समाप्त करते हुए एक नए युग की शुरुआत करती है।
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जर्मनी के दोनों विभाजित हिस्सों का यह पुनर्मिलन विश्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद से जर्मनी की भूमि दो भिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं के अधीन रही थी, जो शीतयुद्ध की राजनीति का प्रतीक बन गई थी।
विभाजन के दशकों में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी अलग-अलग आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मार्गों पर चलते रहे। सोवियत प्रभाव वाले पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव वाले पश्चिमी जर्मनी के बीच गहरी खाई बनी रही। इस अवधि में बर्लिन की दीवार दोनों हिस्सों को विभाजित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण संरचना बन गई थी।
शीतयुद्ध की समाप्ति के साथ-साथ पुनर्मिलन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगीं। सोवियत संघ के विघटन ने पूर्वी यूरोप में राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता खोल दिया, जिससे जर्मनी की एकता की दिशा में प्रयास तेज हो गए।
यह एकीकरण न केवल जर्मनी के लिए बल्कि संपूर्ण यूरोप के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसने दिखाया कि राजनीतिक विभाजन अंत में मानवीय आकांक्षा और ऐतिहासिक परिवर्तन के सामने कितना क्षणभंगुर हो सकता है।