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जीआईडीएस के भविष्य को लेकर चिंता, संकाय पदों पर नियुक्ति रुकी हुई
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा समर्थित राष्ट्रीय संस्थान गंभीर संकट का सामना कर रहा है। वर्ष 2016 के बाद से संस्थान में कोई भी स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है।
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भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) और राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित गिंदस (जीआईडीएस) के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। संस्थान में संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के पदों पर खाली जगहें बनी हुई हैं, जो इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पिछले सात वर्षों से संस्थान में किसी भी पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है। 2016 के बाद से कोई नया कर्मचारी नहीं जोड़ा गया है, जिससे संस्थान की शोध और शिक्षण गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
इस स्थिति के परिणामस्वरूप संस्थान के मूल उद्देश्यों को पूरा करने में कठिनाई आ रही है। विद्वानों और शोधार्थियों का मानना है कि यदि शीघ्र ही नियुक्तियां न की गईं तो संस्थान की प्रतिष्ठा और कार्यक्षमता दोनों को नुकसान पहुंचेगा।
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए संबंधित प्राधिकारियों से तुरंत कदम उठाने की मांग की जा रही है ताकि संस्थान अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा सके।