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डिलीवरी पार्टनर के काम में छिपे हैं कई जोखिम, मजदूरी कटने का खतरा

गिग इकॉनमी में डिलीवरी पार्टनर की नौकरी आकर्षक दिखती है, लेकिन कंपनियों की कड़ी शर्तें और दंड की व्यवस्था इस काम को जोखिमभरा बनाती है। विस्तृत नियम-कानून पढ़ने पर श्रमिकों को तमाम नुकसान का सामना करना पड़ता है।

LSN India · 13 October 2026

डिलीवरी पार्टनर के काम में छिपे हैं कई जोखिम, मजदूरी कटने का खतरा

ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के साथ डिलीवरी पार्टनर या गिग वर्कर की मांग भी तेजी से बढ़ी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर ऐसी सफलता की कहानियां मिलती हैं कि कुछ लोग इसी काम से महीने में हजारों रुपये कमा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है।

डिलीवरी प्लेटफॉर्मों द्वारा निर्धारित नियमावली और शर्तें काफी कठोर होती हैं। इन नियमों में कार्यकर्ताओं को किसी भी गलती या विलंब के लिए मजदूरी में कटौती का प्रावधान होता है। प्रत्येक डिलीवरी में गुणवत्ता, समय पर पहुंचना और ग्राहक संतुष्टि जैसे मापदंड का कड़ाई से पालन करना पड़ता है।

इसके अलावा, गिग वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी, बोनस, छुट्टी या स्वास्थ्य बीमा जैसी किसी भी कानूनी सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता। किसी भी विवाद की स्थिति में इनके पास कोई आधिकारिक शिकायत निवारण तंत्र नहीं होता। काम के दौरान चोट लगने या अन्य समस्याओं में कर्मचारियों को अपने ऊपर पूरा दारोमदार होता है।

श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि गिग वर्कर्स को ठीक तरीके से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसके साथ ही, डिलीवरी प्लेटफॉर्मों की नीतियों में अधिक पारदर्शिता और न्यायसंगतता होनी चाहिए ताकि कर्मचारियों के साथ अन्याय न हो।