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पुत्र प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बढ़ रहा है बालिकाओं का जन्म अनुपात
भारत में उन इलाकों में लड़कियों के जन्म दर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है जहां परंपरागत रूप से पुत्र को प्राथमिकता दी जाती थी। दूसरे और उसके बाद के जन्मों में यह सकारात्मक प्रवृत्ति सबसे अधिक स्पष्ट है।
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भारत के विभिन्न राज्यों में समाज की मानसिकता में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां बालिकाओं के जन्म अनुपात में वृद्धि हुई है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में यह परिवर्तन अधिक स्पष्ट है जहां ऐतिहासिक रूप से पुत्र प्राथमिकता की परंपरा गहराई से जड़ें जमाए हुई थी।
जनसांख्यिकीय आंकड़ों से पता चलता है कि परिवारों में दूसरे और बाद के बच्चों के जन्म में यह सकारात्मक रुझान सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यह क्षेत्र वह रहा है जहां पारंपरिक रूप से पुत्र को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति सर्वाधिक प्रबल थी। शिक्षा के प्रसार, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों और कानूनी हस्तक्षेप के संयुक्त प्रभाव से समाज में सांस्कृतिक बदलाव आ रहा है।
यह सकारात्मक प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि दशकों से चली आ रही सामाजिक समस्याओं के समाधान में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है। हालांकि विशेषज्ञ सतर्क हैं कि इस सुधार को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास और जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।