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भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल
यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में भारतीय सांस्कृतिक खजाने को मान्यता मिली है। 17 अप्रैल 2025 को विश्व भर से 74 नई दस्तावेजी धरोहरें इस प्रतिष्ठित सूची में जोड़ी गईं।
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यूनेस्को ने भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देते हुए भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र की ऐतिहासिक पांडुलिपियों को अपनी मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया है। यह निर्णय 17 अप्रैल 2025 को घोषित किया गया, जब वैश्विक स्तर पर कुल 74 नई दस्तावेजी धरोहरों को इस सूची में जोड़ा गया।
भगवद्गीता की ये पांडुलिपियां हिंदू दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो भारतीय सभ्यता की बौद्धिक विरासत का प्रतीक हैं। इसी तरह, भरतमुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र नाटक, संगीत और कला के सिद्धांतों का एक अद्वितीय ग्रंथ है, जिसका प्रभाव एशिया भर की कलात्मक परंपराओं पर पड़ा है।
यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में स्थान पाने का मतलब है कि ये दस्तावेज मानवता की सार्वभौमिक धरोहर माने जाते हैं। इस स्वीकृति से इन पांडुलिपियों का संरक्षण, अनुसंधान और डिजिटलीकरण को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा।
भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक मंच पर इस तरह की पहचान मिलना देश की गौरवशाली परंपराओं के प्रति विश्व समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उपलब्धि भारतीय विद्वानों और संरक्षणकर्ताओं के दशकों के प्रयासों का फल है।