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नेपाल में बाढ़ से पहले ग्लेशियर गिरा, 100 किमी का विनाशकारी सफर
नेपाल-चीन सीमा पर स्थित एक ग्लेशियर पर्वत से अलग होकर सौ किलोमीटर तक की दूरी तय करते हुए कई नदियों से होकर बहा। तृशूली नदी इस घातक प्रवाह का सबसे लंबा मार्ग बनी।
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नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ का मूल कारण एक बड़े ग्लेशियर के गिरने में निहित है। नेपाल-चीन सीमावर्ती इलाके में स्थित एक पर्वत शिखर से अलग हुआ यह ग्लेशियर सौ किलोमीटर की लंबी यात्रा पर निकला। इस दौरान वह कई नदियों से होकर बहा और अपने रास्ते में विनाश मचाता चला गया।
जलप्रवाह की सबसे बड़ी और सबसे विनाशकारी यात्रा तृशूली नदी की घाटी से होकर हुई। ग्लेशियर के टुकड़ों और मलबे का यह तेजी से बढ़ने वाला प्रवाह नदी के किनारे के इलाकों में भारी नुकसान का कारण बना। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों की स्थिरता में क्रमिक गिरावट आ रही है।
यह घटना हिमालयी बेल्ट में बढ़ते खतरों की ओर इशारा करती है। पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियरों के संकट के कारण आने वाले समय में नीचे बसे इलाकों को भीषण आपदाओं का खतरा बना रह सकता है। क्षेत्र के देशों को इस खतरे से निपटने के लिए बेहतर निगरानी और आपातकालीन प्रणालियां विकसित करनी होंगी।