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COP31: भारत के लिए 2035 तक 35% बिजली का लक्ष्य कितना व्यावहारिक?
वैश्विक मंच पर 2035 तक ऊर्जा खपत में बिजली का हिस्सा 35 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव आकर्षक लग रहा है। लेकिन क्या यह भारत के लिए सही महत्वाकांक्षा है, यह सवाल उठ रहा है।
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COP31 में विश्व के प्रमुख देशों ने ऊर्जा खपत के मामले में एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस '35x35' योजना के तहत 2035 तक विद्युत का हिस्सा कुल ऊर्जा उपभोग का 35 प्रतिशत होना चाहिए। यह पहली नज़र में जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक सकारात्मक कदम दिख रहा है।
हालांकि, भारत जैसे विकासशील देश के संदर्भ में इस लक्ष्य की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भारत की ऊर्जा चाहिदें और उसके आर्थिक विकास के मार्ग को देखते हुए, यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या 2035 तक इतनी तेजी से विद्युतीकरण संभव है।
भारत की ऊर्जा नीति निर्माताओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बुनियादी ढांचे के विकास, अक्षय ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता और निवेश की आवश्यकता जैसे कारकों को ध्यान में रखना होगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में विद्युत पहुंच और औद्योगिक क्षेत्र की बिजली की मांग दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक महत्वाकांक्षा और देश विशेष की परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। भारत को न केवल अपनी वर्तमान ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, बल्कि सामाजिक विकास और आर्थिक वृद्धि भी सुनिश्चित करनी है।