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वैश्विक बांड बाजार में उथल-पुथल, अमेरिकी दीर्घकालीन प्रतिफल 19 साल के उच्चतम स्तर पर
राजकोषीय चिंताओं और तेल की कीमतों में तेजी के बीच वैश्विक बांड बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। जापान और जर्मनी के बांड यील्ड भी दशकों के उच्चतम स्तर को छू गए हैं।
LSN India ·
अमेरिकी 30 साल के बांड का प्रतिफल पिछले 19 वर्षों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बांड बाजारों में तीव्र गतिविधि देखी जा रही है। यह उछाल राजकोषीय स्थिति से संबंधित बढ़ती चिंताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि के कारण आया है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी इसी प्रवृत्ति का असर दिखाई दे रहा है। जापान का बेंचमार्क 10 साल का सरकारी बांड यील्ड 30 वर्षों के शिखर पर पहुंच गया है, जो क्षेत्र में मुद्रास्फीति और ब्याज दर की बढ़ती अपेक्षाओं को दर्शाता है। इसी अवधि में यूरोपीय बाजारों में भी समान दबाव देखे जा रहे हैं।
जर्मनी का 10 साल का बांड यील्ड हाल ही में मई 2011 के बाद से सबसे अधिक स्तर पर पहुंच गया है। ये उच्च प्रतिफल मुद्रास्फीति नियंत्रण के प्रयासों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के संकेत हैं।
वेश्विक बांड बाजार की यह गतिविधि निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उच्च उधार लागत और आर्थिक वृद्धि पर संभावित प्रभाव का संकेत देती है। केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक नीति के रुझानों को समझने के लिए इन बांड बाजारों की गतिविधि को बारीकी से देखा जा रहा है।