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जलवायु संकट गहराता है: पेरिस समझौता विफल हो रहा है?
वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी है और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2015 में हस्ताक्षरित पेरिस समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पृथ्वी खतरे के करीब पहुंच रही है।
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पृथ्वी के जलवायु संकट में तेजी आ रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान गति से उत्सर्जन में कमी न आने से ग्रह एक संकटपूर्ण स्थिति में प्रवेश कर सकता है। इसी बीच, 2015 में पेरिस में हुई अंतरराष्ट्रीय जलवायु बातचीत के परिणाम के रूप में तैयार किए गए समझौते की सफलता पर गहरे संदेह हैं।
पेरिस समझौते का लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना था। हालांकि, वर्तमान प्रवृत्तियां दर्शाती हैं कि इस लक्ष्य तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो गया है। कार्बन उत्सर्जन में सार्थक कमी न आने से समझौते की भावना कमजोर पड़ रही है।
विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु कार्रवाई को लेकर असहमति भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। अनेक राष्ट्र अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे पेरिस समझौते के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है। जलवायु विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि तत्काल और ठोस कदम न उठाए गए, तो पृथ्वी के लिए परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब अधिक मजबूत और प्रभावी जलवायु नीतियां बनानी होंगी। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन में तेजी से कटौती करना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गई है।