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विश्व कर्ज संकट: 365 ट्रिलियन डॉलर का बोझ, सरकारें जूझ रहीं
वैश्विक कर्ज 365 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकारें अब अपनी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च करने के लिए मजबूर हो गई हैं।
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विश्व भर में सार्वजनिक और निजी कर्ज का संकट गहराता जा रहा है। कुल वैश्विक कर्ज अब 365 ट्रिलियन डॉलर के भारी आंकड़े तक पहुंच चुका है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद से कई गुना अधिक है। यह संकेत देता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कर्ज के एक विशाल जाल में फंसती जा रही है।
कर्ज के इस बढ़ते बोझ का सबसे गंभीर प्रभाव सरकारों पर पड़ रहा है। सरकारें अपनी कमाई का एक महत्वपूर्ण अंश केवल कर्ज की ब्याज अदायगी में व्यय कर रही हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के लिए आर्थिक संसाधनों का अभाव हो गया है।
अर्थनीति विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति वर्षों के अनियंत्रित उधार और खर्च के कारण बनी है। कोविड-19 महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए लिए गए आपातकालीन कर्ज इस संकट को और भी गहरा कर गए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने चेताया है कि यदि इस रुझान को नियंत्रित नहीं किया गया, तो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सरकारों को कर संग्रहण बढ़ाने, खर्च में कटौती करने और राजकोषीय अनुशासन लाने की आवश्यकता है।