Business · India Bureau
वैश्विक डीजल संकट 2027 तक बना रह सकता है, स्टॉक ऐतिहासिक न्यूनतम पर
विश्वभर में डीजल की आपूर्ति में कमी आ रही है क्योंकि ईंधन का स्टॉक रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया है। सीमित रिफाइनरी क्षमता और भू-राजनीतिक संकटों से आने वाले वर्षों में कीमतें अधिक रह सकती हैं।
LSN India ·

वैश्विक बाजारों में डीजल की कमी का संकट गहराता जा रहा है, जिसके प्रभाव आने वाले वर्षों तक महसूस किए जा सकते हैं। दुनियाभर में डीजल के भंडार ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव डाल रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह संकट 2027 तक बना रह सकता है, जिससे ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि का खतरा बना हुआ है।
इस संकट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। दुनिया भर में रिफाइनरी की क्षमता सीमित रही है और नए संयंत्रों का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और सशस्त्र संघर्ष व्यापार मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिससे डीजल की आपूर्ति में और भी कमी आ गई है।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह परिस्थिति विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि डीजल यहां परिवहन, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों की रीढ़ है। बढ़ी हुई डीजल की कीमतें खाद्य उत्पादन, निर्यात प्रतिस्पर्धा और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि की जाए और भू-राजनीतिक स्थितियों में सुधार हो। तब तक, वैश्विक बाजार में ऊंची डीजल कीमतें बनी रहने की संभावना है।