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वैश्विक अर्थव्यवस्था की सहनशीलता की सीमा पर पहुंची: आईएमएफ
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की लचक क्षमता समाप्त हो रही है। संगठन ने 2027 तक आर्थिक वृद्धि 3.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया है।
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विश्व आर्थिक दृष्टिकोण रिपोर्ट में आईएमएफ ने संकेत दिया है कि चल रहे ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। संगठन के अनुसार, विकसित और विकासशील देशों दोनों में आर्थिक गतिविधि को बनाए रखने की क्षमता कमजोर पड़ रही है।
आईएमएफ के विश्लेषण से पता चलता है कि ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति व्यवधान उत्पादन लागत बढ़ा रहे हैं। इसका सीधा असर महंगाई और व्यवसायिक निवेश पर पड़ रहा है। विश्व आर्थिक संस्था का मानना है कि यह स्थिति अगर जारी रहती है तो वैश्विक विकास दर में और भी गिरावट आ सकती है।
हालांकि, आईएमएफ ने अपेक्षा व्यक्त की है कि 2027 तक वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यह अनुमान मानता है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और अर्थव्यवस्थाएं अनुकूल नीतिगत समर्थन से लाभान्वित होंगी।
आईएमएफ की चेतावनी सदस्य देशों से कहती है कि वे ऊर्जा संकट का समाधान करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। स्थायी आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए ऊर्जा नीति में सुधार और नवीकरणीय स्रोतों की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण है।