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ईरान संकट से ऊर्जा मूल्य बढ़ने से ईंधन सब्सिडी एक ट्रिलियन डॉलर को छू सकती है
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचने से सरकारों पर ईंधन सब्सिडी का वैश्विक बोझ बढ़ सकता है। आने वाले महीने मूल्य नियंत्रण और कर छूट जैसी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक ईंधन सब्सिडी एक ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान के संकट से उपजे ऊर्जा संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
यूएनडीपी के विश्लेषण के अनुसार, दक्षिण एशिया समेत विकासशील देशों की सरकारें अपनी आबादी को बढ़ती ऊर्जा लागत से बचाने के लिए व्यापक सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण नीतियां लागू कर रही हैं। इन उपायों से सरकारों के राजस्व पर भारी दबाव पड़ रहा है।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि आने वाले दो-तीन महीने इन सरकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। इस अवधि में लिए गए फैसलों से यह तय होगा कि ये देश ऊर्जा संकट से कितनी कुशलता से निपट सकेंगे। कई विशेषज्ञ सब्सिडियों को लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानते हैं और सरकारों को अधिक संतुलित नीतियां अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। ईंधन सब्सिडी में वृद्धि से इन देशों के बजट पर दबाव बढ़ेगा।