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संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं स्पष्ट, नए समाधान की जरूरत: पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं की ऐतिहासिक भूमिका रही है, लेकिन वर्तमान चुनौतियों के समक्ष उनकी सीमाएं स्पष्ट दिख रही हैं। उन्होंने नए समाधान और उभरती शक्तियों की आवाज को स्वीकार करने का आह्वान किया।
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भारतीय प्रधानमंत्री ने एक प्रमुख सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि हालांकि ये संस्थाएं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहीं, परंतु आधुनिक विश्व की समस्याओं का समाधान करने में उनकी सीमाएं स्पष्ट रूप से सामने आ गई हैं।
प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में नई शक्तियां उभर रही हैं और नई आवाजें सुनाई दे रही हैं। उनके अनुसार, वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए पारंपरिक दृष्टिकोण के साथ ही नए और अधिक समावेशी समाधानों की तत्काल आवश्यकता है।
इस विचार को व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के ढांचे में सुधार और विकासशील राष्ट्रों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक नए, अधिक न्यायसंगत और प्रतिनिधिमूलक वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता है।