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अमेरिका-चीन एआई गुटबाजी से देश फंसे द्वंद्व में
अमेरिका और चीन अपने-अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता गुट बना रहे हैं। इससे दुनिया के अन्य देशों को दोनों महाशक्तियों के बीच चुनाव करने का दबाव बढ़ रहा है।
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विश्व के दो प्रमुख एआई शक्तियों - अमेरिका और चीन - अपने अलग-अलग गुट गठित कर रहे हैं। इस बढ़ती प्रतिद्वंद्विता में दूसरे देश दोनों ताकतों के फायदे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देशों के पास स्वतंत्र रूप से चुनाव करने की खिड़की तेजी से बंद हो रही है। अब उन्हें अमेरिकी नेतृत्व वाले समूह या चीन के विश्व एआई सहयोग संगठन के बीच एक फैसला लेना पड़ सकता है।
यह विकल्पचयन देशों के लिए जटिल है। एक ओर अमेरिका के पास सबसे उन्नत चिप्स और एआई तकनीक है। दूसरी ओर चीन की प्रणाली सस्ती और खुली-स्रोत है। इसी चुनौती का सामना कई विकासशील राष्ट्र कर रहे हैं जो दोनों महाशक्तियों से लाभान्वित होना चाहते हैं।
मध्य एशिया का कजाखस्तान एक दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस लगभग 21 लाख आबादी वाले देश ने दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। जून में कजाखस्तान के एआई मंत्री झास्लान मादियेव वाशिंगटन गए और अमेरिकी समूह में शामिल हुए जो एआई आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर काम कर रहा है। मात्र तीन सप्ताह बाद वही मंत्री शंघाई गए और चीन के संगठन के संस्थापक सदस्य के रूप में हस्ताक्षर किए।