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बुढ़ापे की परिभाषा बदलती है, सेवानिवृत्ति की नई नीति बनती है
वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा बढ़ने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक प्रमुख देश ने 2029 से सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का निर्णय लिया है।
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विश्व भर में जनांकिकीय परिवर्तन और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के चलते 'बुढ़ापे' की परंपरागत परिभाषा को चुनौती मिल रही है। आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति के कारण 60 वर्ष की आयु को अब पहले जैसा थका-माँदा दौर नहीं माना जा रहा। इसके बजाय इसे एक सक्रिय कार्यजीवन का हिस्सा माना जाने लगा है।
इसी बदलाव का परिणाम यह है कि कई देशों ने सेवानिवृत्ति नीति में संशोधन कर रहे हैं। एशिया में एक प्रमुख राष्ट्र ने अपनी मूल योजना से एक साल पहले ही 2029 से सेवानिवृत्ति और पुनः नियोजन की आयु सीमा बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम कार्यबल में अनुभवी पेशेवरों को बनाए रखने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और कम जन्मदर के दौर में कार्यशील आबादी को लंबे समय तक सक्रिय रखना आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। इस नीति परिवर्तन से न केवल सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर बोझ कम होगा बल्कि अनुभवी कर्मचारियों की कुशलता का भी लाभ मिलेगा।