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विदेशी शेयरों पर दीर्घकालीन पूंजि लाभ छूट के नियम क्या हैं?
भारत में विदेशी स्टॉक को अनलिस्टेड प्रतिभूतियों के रूप में माना जाता है, जिससे उन पर कर संबंधी नियम देशीय शेयरों से भिन्न होते हैं। निवेशकों को इस अंतर को समझना जरूरी है क्योंकि यह लाभ के वर्गीकरण और 1.25 लाख रुपये की छूट को प्रभावित करता है।
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भारतीय कर कानून में विदेशी प्रतिभूतियों को अनलिस्टेड प्रतिभूतियों की श्रेणी में रखा जाता है। इस कारण, इन पर पूंजीगत लाभ की गणना के लिए न्यूनतम धारण अवधि और कर दरें, भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध शेयरों से भिन्न होती हैं।
अनलिस्टेड प्रतिभूतियों के मामले में, दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ माना जाता है जब निवेश को तीन वर्ष से अधिक समय तक धारित किया जाए। इसके विपरीत, सूचीबद्ध शेयरों के लिए यह अवधि मात्र एक वर्ष है। इस भिन्नता का अर्थ है कि विदेशी शेयरों पर दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर छूट प्राप्त करने के लिए न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि आवश्यक है।
दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर प्रयोज्य कर दर भी भिन्न है। अनलिस्टेड प्रतिभूतियों के लिए यह दर सामान्यतः 20 प्रतिशत होती है, साथ ही विभिन्न सेसेज लागू हो सकते हैं। केंद्रीय बजट के तहत प्रदान की गई 1.25 लाख रुपये की वार्षिक छूट का लाभ कुछ निर्दिष्ट शर्तों के अधीन है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे विदेशी शेयरों में निवेश करते समय इन कर मानदंडों को ध्यान में रखें। किसी भी विशिष्ट परिस्थिति में छूट प्राप्त करने के लिए कर विशेषज्ञ की परामर्श लेना उचित है।