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गोवा खनन घोटाले की जांच ठप्प, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अनदेखा
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 और 2018 में साफ किया था कि नवंबर 2007 के बाद सभी खनन गतिविधियां अवैध थीं। लेकिन साक्ष्य की कमी और अंतहीन देरी के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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गोवा के अवैध खनन से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय के बावजूद जांच प्रक्रिया ठप्प पड़ी है। अदालत ने 2014 में और फिर से 2018 में स्पष्ट किया था कि 22 नवंबर 2007 के बाद किया गया समस्त खनन कार्य अवैध है। इसके बाद भी इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य न होना इस मामले के ठंडे पड़ने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं के कारण जांच में लंबी देरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय की बर्बादी से अवैध खनन में शामिल लोग निशाने से बाहर निकल गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य स्तरीय अधिकारियों की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलना भी एक मुद्दा है। पर्यावरण और कानून प्रवर्तन की दृष्टि से यह मामला बेहद संवेदनशील है, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें प्रगति नहीं हुई है।
गोवा का खनन क्षेत्र देश के सबसे समृद्ध लौह अयस्क क्षेत्रों में से एक है। अवैध खनन न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनता है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले को प्राथमिकता देते हुए और कठोर कार्रवाई करते हुए ही न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।