Politics · India Bureau
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा, लेकिन जोखिम भी बढ़ा
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार लगातार पांचवें सप्ताह घटकर 726 अरब डॉलर रह गए हैं। वहीं, 2019 के बाद से सोने की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ी है, जिससे मूल्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ गया है।
LSN India ·

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट जारी है। पिछले पांच सप्ताह में लगातार कमी आ रही है और अब यह 726 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है। यह गिरावट देश की विदेशी मुद्रा प्रबंधन में अहम बदलाव को दर्शाती है।
विदेशी मुद्रा भंडार की संरचना में सोने का महत्व पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। 2019 के बाद से सोने की हिस्सेदारी में लगभग तीन गुना की वृद्धि हुई है। यह रणनीतिक निर्णय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास माना जा सकता है।
हालांकि, सोने की बढ़ती हिस्सेदारी विदेशी मुद्रा भंडार को अतिरिक्त जोखिम से भी अवगत कराती है। वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव सीधे भारत के भंडार के मूल्य को प्रभावित करते हैं। सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कारकों, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार को इस बदलती परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए भंडार प्रबंधन की रणनीति पर निरंतर नजर रखनी होगी। विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय भुगतान क्षमता का प्रमुख संकेतक है। अत: इसके संरचना और मूल्य में संतुलन बनाए रखना राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत जरूरी है।