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यूपीआई नेटवर्क के रखरखाव का खर्च सरकार उठा सकती है: बीजेडी सांसद
भारतीय जनता दल के सांसद संतृप्त मिश्रा का मानना है कि यूपीआई संचालन करने वाली एनपीसीआई के पास वित्तीय क्षमता है। उन्होंने कहा कि इस संस्था के शेयरहोल्डरों में बड़े बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
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भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को लेकर चल रही चर्चा में बीजेडी के सांसद संतृप्त मिश्रा ने कहा है कि सरकार यूपीआई नेटवर्क के रखरखाव का आर्थिक बोझ वहन करने की क्षमता रखती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विशाल प्रणाली देश की आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) संचालित करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के पास विभिन्न आर्थिक हित हैं। मिश्रा के अनुसार, इस संगठन के शेयरहोल्डर और प्रमोटर के रूप में देश के प्रमुख वित्तीय संस्थान तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म काम कर रहे हैं।
सांसद का यह विचार इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि यूपीआई ने पिछले वर्षों में भारत में डिजिटल लेनदेन को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया है। मिलियन लेनदेन प्रतिदिन संपन्न होते हैं और यह प्रणाली विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर वित्तीय समावेशन में योगदान दे रही है।
मिश्रा के बयान से संकेत मिलता है कि यूपीआई के बुनियादी ढांचे की देखभाल के लिए सरकारी समर्थन एक जरूरी विकल्प हो सकता है। उनका मत है कि एनपीसीआई के मजबूत वित्तीय आधार को देखते हुए, इस महत्वपूर्ण भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा सकते हैं।