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सरकार ने जारी किए जीडीपी संशोधन पर सवाल-जवाब, नई पद्धति की दी व्याख्या
भारत सरकार ने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई जीडीपी श्रृंखला लागू की है। इसके तहत वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमान में संशोधन किया गया है।
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सरकार ने नई राष्ट्रीय लेखा पद्धति को लेकर व्यापक प्रश्नोत्तर (एफएक्यू) जारी किए हैं, जिसमें संशोधित जीडीपी आंकड़ों और गणना के नए तरीकों की विस्तृत व्याख्या दी गई है। नई जीडीपी श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में अपनाया गया है, जो पिछली पद्धति में 2011-12 से बदलाव है।
इस संशोधन से आर्थिक डेटा अधिक वर्तमान और प्रासंगिक हो गया है, जो हाल के आर्थिक संरचना में आए बदलावों को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करता है। सरकार के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाता है और तुलनीयता में सुधार करता है।
प्रकाशित एफएक्यू दस्तावेज में जीडीपी की गणना में शामिल विभिन्न क्षेत्रों, डेटा संग्रहण विधियों और सांख्यिकीय समायोजनों की व्याख्या की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई पद्धति अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक चित्र प्रदान करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधार वर्ष को अद्यतन करने से तुलनात्मक विश्लेषण में सुधार होगा और नीति-निर्माताओं को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह संशोधन अर्थव्यवस्था की गतिशीलता और संरचनात्मक परिवर्तनों को अधिक सटीकता से कैप्चर करने के लिए डिजाइन किया गया है।