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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- यूपीआई पर शून्य MDR की कभी स्थायी गारंटी नहीं दी गई
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर ही MDR से छूट दी जाएगी। सरकार ने कहा कि यह सुविधा अनिश्चित काल के लिए प्रदान नहीं की गई है।
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भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया है जिसमें उसने यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की नीति को स्पष्ट किया है। सरकार के अनुसार, व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले (P2M) लेनदेन में 2,000 रुपये तक की राशि पर MDR से छूट दी गई है।
सरकार ने अपने बयान में जोर दिया कि व्यापारियों को कभी भी यह आश्वासन नहीं दिया गया था कि यह छूट अनिश्चित काल तक जारी रहेगी। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यह एक अस्थायी उपाय है जिसकी समीक्षा की जा सकती है।
यह स्टैंड सरकार द्वारा UPI प्ल्यूस नीति के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सुप्रीम कोर्ट में दायर यह हलफनामा एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जो सरकार की नीतियों की वैधानिकता को रेखांकित करता है।
व्यापारियों और डिजिटल भुगतान उद्योग के हलकों में इस निर्णय को लेकर प्रतिक्रिया सामने आ रही है, क्योंकि MDR की नीति डिजिटल लेनदेन की लागत और लाभप्रदता को सीधे प्रभावित करती है।