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CGIC नियम 96(10) को हटाने पर विवाद, सरकार से धनराशि लौटाने की मांग
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर नियम 96(10) को पूर्वव्यापी रूप से हटाए जाने से निर्यातकों से वसूल की गई राशि के संबंध में सवाल उठे हैं। सरकार से इस प्रावधान के तहत वसूल किए गए रिफंड और ब्याज को लौटाने की मांग की जा रही है।
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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा वस्तु एवं सेवा कर नियम 96(10) को पूर्वव्यापी रूप से निरस्त किए जाने से भारतीय निर्यात क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं। यह नियम संशोधन निर्यातकों के साथ वर्षों से किए गए लेनदेन को प्रभावित करता है।
इस प्रावधान के तहत सरकार द्वारा निर्यातकों से जो धनराशि वसूल की गई थी, उसकी वापसी की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वव्यापी नियम परिवर्तन से न केवल वसूल की गई मूल राशि बल्कि उस पर लगाया गया ब्याज भी लौटाया जाना चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर निर्यात उद्योग के विभिन्न हलकों में चिंता व्यक्त की जा रही है, क्योंकि इससे हजारों निर्यातकर्ता प्रभावित हो सकते हैं। सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले की समीक्षा करे और प्रभावित निर्यातकों को उचित मुआवजे प्रदान करे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला करदाता के अधिकार और सरकारी जवाबदेही के मुद्दे को उजागर करता है, और इस पर शीघ्र ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।