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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कॉपीराइट पर सरकारी समिति मौन, रिपोर्ट महीनों से लंबित
भारतीय सरकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कॉपीराइट संबंधी समिति ने दूसरा कार्यपत्र जारी नहीं किया है। फरवरी में जारी होने वाली रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हुई है।
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भारत में डिजिटल अधिकारों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए गठित सरकारी समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कॉपीराइट संरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति का दूसरा कार्यपत्र कई महीने से लंबित पड़ा है।
सरकार ने पहले इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को फरवरी 2024 तक जारी करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, इस समय सीमा में दस्तावेज़ तैयार नहीं हो सका और समिति ने इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी भी साझा नहीं की है। सूचना प्रौद्योगिकी और रचनात्मक उद्योग के लिए यह देरी चिंताजनक बनी हुई है।
इस कार्यपत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उपयोग के दौरान लेखकों, कलाकारों तथा कॉपीराइट धारकों के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव होने की उम्मीद थी। भारतीय रचनात्मक क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने नीति निर्माण में तेजी लाने के लिए सरकार से आग्रह किया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण डेटा के रूप में कॉपीराइट सामग्री के उपयोग को लेकर बहुत विवाद रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा व्यापक बहस का विषय बना हुआ है और भारत की नीति दिशा इस क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।