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ओबीसी क्रीमी लेयर फैसले को लागू करने के लिए सरकार चाहती है दो साल का समय
भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के ओबीसी क्रीमी लेयर संबंधी फैसले को लागू करने के लिए दो साल की अवधि मांगी है। सरकार का तर्क है कि तुरंत लागू होने से वरिष्ठता और कैडर आवंटन में व्यवधान आ सकता है।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से ओबीसी क्रीमी लेयर मानदंडों पर दिए गए फैसले को लागू करने के लिए दो वर्षीय समयावधि देने की मांग की है। सरकार ने अदालत में यह तर्क दिया है कि इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने से चल रही और पूर्ववर्ती भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
सरकार की दलील के अनुसार, सीधी और तत्काल कार्यान्वयन से कर्मचारियों की वरिष्ठता सूचियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही, विभिन्न कैडरों में कर्मचारियों का आवंटन प्रभावित हो सकता है और प्रशासनिक संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने क्रमिक कार्यान्वयन का प्रस्ताव दिया है।
यह मुद्दा भारतीय संविधान में अन्य पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के प्रावधानों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित दो वर्षीय अवधि में आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा सकेंगी और नीतिगत बदलावों को सुचारु तरीके से क्रियान्वित किया जा सकेगा।
अदालत के समक्ष यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्रीमी लेयर के मानदंडों को कितने व्यापक रूप से लागू किया जाए और इससे कितने लोग प्रभावित होंगे। सरकार का आवेदन अब न्यायालय के विचारार्थ है।