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यूपीआई एमडीआर पर सरकार अड़ी, विपक्ष और व्यापारियों का दबाव जारी
वित्त मंत्रालय ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट के पीछे अमेरिकी दबाव होने के दावों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल और व्यापारी संगठन इस नीति पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
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यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का मुद्दा केंद्रीय सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव का बिंदु बन गया है। सरकार ने इस नीति पर अपना रुख कठोर बनाए रखते हुए कहा है कि यह निर्णय पूरी तरह घरेलू विचारों के आधार पर लिया गया है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई एमडीआर को लेकर किसी विदेशी दबाव की बातें निराधार हैं। मंत्रालय का दावा है कि यह कदम डिजिटल भुगतान प्रणाली को टिकाऊ और लागत-प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक था। सरकार के अनुसार, यह फैसला विभिन्न हितधारकों और तकनीकी विशेषज्ञों से परामर्श लेकर लिया गया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और व्यापारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले को चुनौती दी है। व्यापारियों का तर्क है कि एमडीआर से छोटे दुकानदारों और सूक्ष्म उद्यमियों पर असर पड़ेगा। विपक्ष ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, लेकिन सरकार अपने रुख पर दृढ़ प्रतीत हो रही है।
इस विवाद के बीच, डिजिटल भुगतान उद्योग के विभिन्न खिलाड़ियों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हालांकि, वित्त मंत्रालय का इशारा है कि नीति पर कोई बदलाव होने की संभावना कम है। सरकार का मानना है कि लंबे समय में यह कदम यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा।