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महिला पत्रकारों पर हमले को लेकर सरकार का विवादास्पद बयान
महिला पत्रकारों पर होने वाले हमलों की घटनाओं पर सरकार ने कहा है कि उसे यह पता नहीं है कि घटनास्थल पर कौन वीडियो बनाने वाला था और कौन पत्रकार था।
LSN India ·

सरकार ने महिला पत्रकारों पर की गई हिंसा की घटनाओं पर एक विवादास्पद रुख अपनाया है। सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि उन्हें यह अंतर करना मुश्किल है कि किसी घटना में मौजूद महिलाएं वास्तव में पत्रकार हैं या फिर सिर्फ सोशल मीडिया सामग्री निर्माता हैं।
इस बयान के माध्यम से सरकार का तात्पर्य यह है कि पत्रकारिता के अलग-अलग रूपों के बीच स्पष्टता का अभाव है। सरकार के मुताबिक, डिजिटल माध्यम के जमाने में रीलस और वीडियो बनाने वाले और पारंपरिक पत्रकारों के बीच अंतर करना आसान नहीं है।
यह रुख मीडिया और नागरिक अधिकार संगठनों की ओर से आलोचना का विषय बन गया है। विरोधियों का कहना है कि महिला पत्रकारों को होने वाली हिंसा की गंभीरता को कम करने की कोशिश की जा रही है। वे मानते हैं कि चाहे कोई पारंपरिक पत्रकार हो या डिजिटल कंटेंट निर्माता, उसके साथ हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा देश में लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। संगठनों और समाचार माध्यमों ने बार-बार सरकार से महिला पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।