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₹100 करोड़ घोटाले में अनबिल महेश पोयामोझी का हाई कोर्ट में दावा
मद्रास हाई कोर्ट में अनबिल महेश पोयामोझी ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ जांच के लिए केवल राज्यपाल ही अनुमति दे सकते हैं, न कि सार्वजनिक विभाग सचिव। उन्होंने कहा कि 23 जून 2026 को दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट को रद्द किया जाना चाहिए।
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मद्रास उच्च न्यायालय में अनबिल महेश पोयामोझी ने ₹100 करोड़ के घोटाले के मामले में दायर प्राथमिकी को चुनौती देते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दावा किया कि उनके विरुद्ध जांच के लिए आवश्यक अनुमति केवल राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रदान की जा सकती है, न कि किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा।
पोयामोझी के कानूनी पक्ष का तर्क है कि सार्वजनिक विभाग के सचिव द्वारा 23 जून 2026 को दी गई अनुमति कानूनी रूप से वैध नहीं है। उनके अनुसार, यह प्राधिकार उनके विरुद्ध पंजीकृत प्रथम सूचना रिपोर्ट को अमान्य बनाता है।
यह मामला संवैधानिक अधिकारों और सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है। हाई कोर्ट अब इस विषय पर सुनवाई करेगा कि क्या जांच के लिए राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है।
यह केस अनुच्छेद 197 के प्रावधानों से जुड़ा है, जो सरकारी कर्मचारियों को आपराधिक मामलों में विशेष सुरक्षा प्रदान करता है। मामले की सुनवाई अगली तारीख में जारी रहेगी।