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सुभाष चंद्रा मामला: 99.97% कटौती घाटे का संकेत नहीं - सरकार

सुभाष चंद्रा के NCLT आदेश को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यक्तिगत गारंटी का असाधारण मामला है और कॉर्पोरेट दिवालियापन कानून के तहत वसूली से अलग माना जाना चाहिए।

LSN India · 27 August 2026

सुभाष चंद्रा के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में 22,000 करोड़ रुपये पर लगभग 99.97 प्रतिशत की कटौती का मतलब यह नहीं है कि सरकार को वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ है।

सरकारी सूत्रों ने जोर देते हुए कहा है कि चंद्रा का यह मामला एक असाधारण व्यक्तिगत गारंटी संबंधी समाधान है। इसे कॉर्पोरेट दिवालियापन कानून (IBC) के तहत सामान्य कॉर्पोरेट ऋण वसूली के साथ समान तुलना में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकारी प्रवक्ताओं ने कहा कि व्यक्तिगत गारंटी के मामलों में वसूली प्रक्रिया कॉर्पोरेट दिवालियापन से भिन्न होती है। इसके अलग कानूनी और वित्तीय निहितार्थ हैं जिन्हें अलग से समझा जाना आवश्यक है।

यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उद्योग जगत में चंद्रा के मामले को लेकर व्यापक चर्चा हुई है। सरकार की ओर से दिया गया यह बयान सुझाता है कि इस उच्च कटौती को परिस्थितिजन्य समझा जाना चाहिए, न कि व्यापक नीति के रूप में।