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2018 में बर्मी अजगरों पर लगे GPS टैग से मिला सीमित डेटा
वैज्ञानिक अध्ययन में 13 बर्मी अजगरों पर लगाए गए GPS टैग ने कुल समय का मात्र 18.1 प्रतिशत तक स्थान की जानकारी दर्ज की। यह शोध वन्यजीव ट्रैकिंग तकनीक की सीमाओं को उजागर करता है।
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2018 में आयोजित एक वैज्ञानिक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 13 बर्मी अजगरों के ट्रैकिंग के लिए GPS टैग का इस्तेमाल किया था। हालांकि, इस प्रयोग के दौरान यह पता चला कि ये उपकरण कुल अवधि का केवल 18.1 प्रतिशत ही सफलतापूर्वक स्थान डेटा दर्ज कर सके।
यह परिणाम वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान में GPS प्रौद्योगिकी के उपयोग की बड़ी चुनौतियों को दर्शाता है। सरीसृप जैसी प्रजातियों पर GPS टैग लगाने में बैटरी क्षमता, उपकरण आकार और पर्यावरणीय कारकों से संबंधित समस्याएं आती हैं।
अजगर जैसे बड़े सरीसृपों की गतिविधियों और प्रवास पैटर्न को समझने के लिए विश्वसनीय ट्रैकिंग डेटा अत्यावश्यक है। यह अध्ययन दर्शाता है कि शोधकर्ताओं को वन्यजीव निगरानी के लिए अधिक विकसित और टिकाऊ तकनीकें विकसित करने की आवश्यकता है।