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शिक्षित युवाओं की नौकरी दर पांच साल के निचले स्तर पर पहुंची
सितंबर में भारत में स्नातकों की श्रम बाजार में भागीदारी दर पांच साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। शिक्षित जनसंख्या की तुलना में रोजगार के अवसर कम दर से बढ़ रहे हैं।
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भारत में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या गहराई ले रही है। सितंबर माह के आंकड़ों से पता चलता है कि स्नातक श्रेणी के काम करने वाले और नौकरी तलाश करने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। यह दर पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रही है, जो देश की श्रम बाजार में एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण यह है कि देश में स्नातकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए उपलब्ध रोजगार के अवसर इसी गति से नहीं बढ़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश के बावजूद, उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को रोजगार मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
चिंताजनक बात यह भी है कि सक्रिय रूप से नौकरी तलाश करने वाले स्नातकों की संख्या भी कम हुई है। कई शिक्षित युवा नौकरी की खोज से निराश होकर श्रम बाजार से बाहर हो रहे हैं। यह प्रवृत्ति न केवल व्यक्तिगत रूप से युवाओं के लिए समस्याजनक है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मानव संसाधन के सदुपयोग में भी बाधा डाल रही है।
इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि भारत को अपनी शिक्षा नीति और रोजगार सृजन की रणनीति में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। स्नातकों के कौशल और बाजार की मांग के बीच बेमेल होना एक बड़ी चुनौती बन गई है।