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लेखक के विचारों को समझना अनुवाद की कला का मूल: न्यायमूर्ति रमना
पूर्व प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमना का मानना है कि अच्छे अनुवादक की पहचान महान साहित्य को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत करने की क्षमता से होती है। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की 'गीतांजलि' के तेलुगु अनुवाद के विमोचन अवसर पर यह विचार व्यक्त किए।
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रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कृति 'गीतांजलि' के तेलुगु अनुवाद के विमोचन समारोह में भाग लेते हुए पूर्व प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमना ने साहित्य अनुवाद की गहन समझ को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि किसी पाठ का सार्थक अनुवाद करने के लिए अनुवादक को लेखक के विचारों और भावनाओं की गहराई से समझ होनी आवश्यक है।
रमना के अनुसार, एक सशक्त अनुवादक की विशेषता यह है कि वह महान साहित्य को आम पाठकों के लिए सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत करे, किंतु साथ ही साथ मूल कृति के साहित्यिक सौंदर्य और गुणवत्ता को बरकरार रखे। यह दायित्व अत्यंत नाजुक और महत्वपूर्ण होता है।
टैगोर की 'गीतांजलि' विश्व साहित्य की एक अमूल्य कृति है जिसने भारतीय काव्य को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी। इस कृति का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद भारतीय साहित्य के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तेलुगु भाषी समुदाय के लिए यह अनुवाद भारतीय साहित्यिक धरोहर को और अधिक सुलभ बनाता है।
यह पहल भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य की उपलब्धता को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। ऐसे अनुवादों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया जा सकता है तथा विभिन्न भाषा-भाषी क्षेत्रों के बीच साहित्यिक संवाद को बेहतर बनाया जा सकता है।