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दिवाली पर हरी पटाखों को लागू करना क्यों मुश्किल है

राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लोग बार-बार नजरअंदाज करते आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पर्यावरण अनुकूल पटाखों के इस्तेमाल को सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

LSN India · 3 November 2026

दिवाली पर हरी पटाखों को लागू करना क्यों मुश्किल है

दिवाली के मौसम में देश भर में पटाखों का इस्तेमाल परंपरा का हिस्सा है, लेकिन प्रदूषण की समस्या के कारण कई शहरों में इस पर नियंत्रण लाने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, पर्यावरण के अनुकूल हरी पटाखों को लागू करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में पिछले वर्षों में पटाखों पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं, लेकिन आम जनता इन नियमों का पालन नहीं करती।

विशेषज्ञों का मानना है कि हरी पटाखों को बढ़ावा देने के लिए जनता में जागरूकता लाना आवश्यक है। साथ ही, इन पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की उपलब्धता और कीमत भी एक महत्वपूर्ण कारक है। बाजार में अभी भी परंपरागत पटाखों की भरमार है और उनकी कीमत हरी पटाखों से कम होती है।

प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, दिल्ली और अन्य शहरों में पटाखों की खरीद-बिक्री जारी रहती है। कानून के प्रवर्तन में कमजोरियां और सामूहिक सामाजिक चेतना का अभाव भी इसका कारण बनता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हरी पटाखों को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक भागीदारी और सख्त कानून प्रवर्तन दोनों की जरूरत है।