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GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति छिनी, अभियोजन की सीमा बढ़ी
GST परिषद ने अभियोजन के लिए न्यूनतम सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पाँच करोड़ रुपये कर दिया है। इसका मतलब यह है कि पाँच करोड़ से कम राशि वाले मामलों में अब कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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भारत के वस्तु एवं सेवा कर प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। GST परिषद ने अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को सीमित करने के साथ-साथ अभियोजन की न्यूनतम सीमा को पाँच गुना बढ़ा दिया है।
नई नीति के अनुसार, पाँच करोड़ रुपये से कम की धनराशि से संबंधित GST उल्लंघन के मामलों में अब आपराधिक अभियोजन दर्ज नहीं किया जाएगा। यह निर्णय छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए राहत लेकर आता है जो अनजाने में नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं।
GST अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकार में भी कटौती की गई है। यह कदम सरकार द्वारा व्यावसायिक समुदाय की शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है कि कर नियमों का कठोर प्रवर्तन व्यापार में बाधा डाल रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति परिवर्तन कर अनुपालन को प्रोत्साहित करेगा और साथ ही बड़े कर अपवंचन मामलों पर सरकारी संसाधनों को केंद्रित करने में मदद करेगा। तथापि, व्यावसायिक नियमों की स्पष्टता के लिए सरकार से और दिशानिर्देश जारी करने की प्रत्याशा है।