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धनतेरस पर यम दीपक जलाने की विधि और शुभ समय
धनतेरस के दिन यम दीपक का जलाया जाना परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यम दीपदान की सही विधि, दिशा और समय को जानें।
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धनतेरस का पर्व समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन यम दीपक को जलाना आध्यात्मिक परंपरा का अभिन्न अंग है। हिंदू धर्म में माना जाता है कि यम दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और परिवार की रक्षा होती है।
यम दीपक को परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए जलाया जाता है। पारंपरिक विधि के अनुसार, यह दीपक घर के दक्षिण-पश्चिम कोण में रखा जाता है। माना जाता है कि दक्षिण दिशा यम से संबंधित है, इसलिए इसी दिशा में दीपक का स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है।
यम दीपदान की विधि में सरसों का तेल और सूती बत्ती का उपयोग किया जाता है। दीपक को सूर्यास्त के बाद जलाया जाता है और पूरी रात इसे जलने दिया जाता है। कुछ परिवारों में इस दीपक को अगली सुबह तक जलाए रखने की परंपरा है।
यम दीपक जलाते समय मंत्रों का पाठ करने की भी परंपरा है। इसे परिवार के सभी सदस्यों की दीर्घायु और कल्याण के लिए समर्पित किया जाता है। धनतेरस पर यह अनुष्ठान आध्यात्मिक सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक शांति दोनों प्रदान करता है।