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हवाई में 143 साल पहले लाई गई घास अब बन गई बड़ी समस्या
19वीं सदी में चारागाह के लिए हवाई द्वीपसमूह में आई गिनी घास आज पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन गई है। यह पौधा 9 फीट तक बढ़ता है और हजारों बीज पैदा करता है।
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हवाई द्वीपसमूह में एक सदी से अधिक पहले पशुपालन के उद्देश्य से लाई गई गिनी घास अब द्वीपों की प्राकृतिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। 1883 में इसके आगमन के बाद से यह घास तेजी से फैली है और इसकी ऊंचाई नौ फीट तक पहुंच गई है।
यह सदाबहार पौधा अपनी मजबूत प्रजनन क्षमता के लिए जाना जाता है और एक पौधे से हजारों बीज निकलते हैं। इसकी यह विशेषता इसे द्वीपों के विभिन्न इलाकों में तेजी से फैलने में सक्षम बनाती है। साथ ही, जंगल की आग के बाद भी यह पौधा तेजी से फिर से उग आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गिनी घास की यह तेजी से वृद्धि जंगल में आग के खतरे को और अधिक बढ़ा देती है क्योंकि यह अत्यधिक मात्रा में सूखे ईंधन का काम करती है। इस विदेशी पौधे ने हवाई के स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
यह मामला आयातित पौधों की दीर्घकालिक पारिस्थितिक प्रभावों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। विभिन्न द्वीपों की अनोखी और नाजुक प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए इस तरह की समस्याओं से निपटना आज के समय की एक प्रमुख जिम्मेदारी बन गई है।