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गुजरात के महाराजा ने द्वितीय विश्व युद्ध में 650 पोलिश बच्चों को दी शरण
1942 में गुजरात के एक राजा ने अपने राज्य के द्वार खोलकर युद्ध से विस्थापित पोलिश बच्चों को आश्रय दिया। यह मानवीय करुणा का एक अनोखा उदाहरण है जो इतिहास में दर्ज है।
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत के एक उदार महाराजा ने अपने राज्य में 650 पोलिश बच्चों को शरण दी थी। यह घटना 1942 में घटित हुई जब गुजरात के इस राजा ने यूरोप में युद्ध से विस्थापित बच्चों के लिए अपने राज्य के दरवाजे खोल दिए। इन बच्चों को पोलैंड में बड़े पैमाने पर उत्पीड़न और विनाश का सामना करना पड़ा था।
महाराजा की इस दूरदर्शी और मानवीय पहल ने हजारों बच्चों को जीवन की सुरक्षा प्रदान की। अपने राज्य में आकर ये बच्चे सुरक्षित वातावरण में पले-बढ़े जहां उन्हें शिक्षा और पालन-पोषण की सुविधाएं मिलीं। यह कदम सांस्कृतिक और धार्मिक सीमाओं से परे मानवीय सहानुभूति का प्रतीक था।
यह ऐतिहासिक घटना भारतीय राजपरिवारों की उदार परंपरा और विश्वव्यापी मानवीय जिम्मेदारी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। युद्ध के बाद इन पोलिश बच्चों को उनके मूल स्थान पर लौटाया गया, लेकिन भारतीय मिट्टी में उनके बिताए हुए समय और मिली सुरक्षा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया।