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गुड़गांव के बुनियादी ढांचे को शहर के आकार के अनुरूप होना चाहिए: आयोग
मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि भारी वर्षा के दौरान सड़कों, स्कूलों और आपातकालीन सेवाओं में बार-बार व्यवधान को शहरी जीवन की अपरिहार्य विशेषता नहीं माना जा सकता। आयोग ने गुड़गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे को शहर की वर्तमान आबादी और आकार के अनुरूप बनाने की मांग की है।
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मानवाधिकार आयोग ने गुड़गांव की नगरपालिका को कड़ी चेतावनी दी है कि शहर के बुनियादी ढांचे को तेजी से शहरीकरण के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य है। आयोग के अनुसार, मौसमी वर्षा के दौरान सड़कों पर जलभराव, स्कूलों का बंद होना, आपातकालीन सेवाओं में रुकावट और जल आपूर्ति में बाधा आना किसी भी आधुनिक शहर के लिए स्वीकार्य नहीं है।
आयोग ने जनता की गतिविधि में आने वाली बार-बार की बाधाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इन समस्याओं को शहरी जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा मानना गलत है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। आयोग के मुताबिक, गुड़गांव जैसे विकसित शहर में इस तरह की बुनियादी सुविधाओं की कमी स्वीकार्य नहीं है।
आयोग ने नगर निकाय से अपेक्षा की है कि वह शहर के बढ़ते आकार और जनसंख्या को देखते हुए जल निकासी प्रणाली, सड़क अवसंरचना और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में तत्काल सुधार करे। बेहतर नियोजन और पर्याप्त निवेश के माध्यम से ऐसी स्थितियों को रोका जा सकता है।
आयोग की टिप्पणी गुड़गांव में भारी बारिश के दौरान बार-बार देखी जाने वाली समस्याओं के संदर्भ में आई है। शहर के तेजी से विकास के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में सुधार न होने से नागरिकों को कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है।