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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से आगे है लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई: CPI(M) सांसद
CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिट्टास का कहना है कि सरकार द्वारा दूसरे दौर के विरोध प्रदर्शनों में अपनाया गया दमनकारी रवैया दरअसल लोकतांत्रिक स्पेस को वापस पाने के संघर्ष का हिस्सा है।
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CPI(M) के वरिष्ठ सांसद जॉन ब्रिट्टास ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर चल रहे आंदोलन का दायरा महज व्यक्तिगत मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक स्पेस को पुनः स्थापित करने की व्यापक लड़ाई का हिस्सा है।
ब्रिट्टास के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस बार के विरोध प्रदर्शनों में अधिक दमनकारी कदम उठाए हैं। सांसद का मानना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को आशंका है कि यदि वह एक बार फिर किसी माने पर झुकती है, तो इसके दूरगामी और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
ब्रिट्टास के अनुसार, यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति के पद से संबंधित नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में मूल अधिकारों और स्वतंत्रता को बरकरार रखने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सरकार के दमनकारी रुख से स्पष्ट है कि वह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
सांसद ने जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए निरंतर सतर्क रहना होगा और ऐसे सभी दमनकारी प्रयासों का विरोध करना होगा ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।